mप्रविण चौधरी
‘आब कोना चलब” नाटक, लेखन–निर्देशन श्री राम भजन कामत, मंचन – विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् द्वाा गुरुकुल मे – एहि नाटकक कइएको मंचन एखन धरि पूरा नेपाल मे भऽ चुकल अछि। एहि नाटक मे नेपालक वर्तमान मे कोन तरहें लोक पहिचानक आधार पर आपसी विभेदक शिकार बनि रहल अछि, कोना लोक मे राजनैतिक परिस्थिति सँ अविश्वास आ सांप्रदायिक सौहाद्र बिगैड रहल अछि तेकरा देखायल गेल अछि । वास्तव मे लोकतंत्र केर प्रवेश सँ यदि देशक नागरिक एक दोसरकेँ मधेशी आ पहाडी कहि घृणा करय, अपन वर्षोंक प्रगाढ दोस्ती तोडय, आ राजनैतिक स्वार्थक पूति र्लेल नागरिक समाज, मानव अधिकारकर्मी, पत्रकार,
सरकारी कर्मचारी आ मोटामोटी सब तंत्र मे एथनिक वार केर स्थिति बनय तऽ कतहु न कतहु नेपालक वर्तमान ”लोकतंत्र” पर प्रश्न चिह्न लगैत छैक। एहि नाटकक मार्फत सँ
राजनीतिकर्मी पर प्रहार करैत आम जनमानस मे सांप्रदायिक सौहाद्र्र कायम रखबाक आह्वान कैल गेल छैक। जेना कि एकर नाम छैक – आब कोना चलब… अर्थात् आगाँक नेपाल मे संविधान तेहेन निर्माण होइक जाहि सँ नागरिक समान अधिकार केर स्थापना होइक आ लोक मे पहिचानक आधार पर विभेद उत्पीडणक अवस्था खत्म होइक। लोक एक–दोसरक संस्कृति आ पहिचान केँ खूब सम्मान करय आ आपसी प्रेम मे कतहु कोनो तरहक कमी नहि आनय। ई नाटक राष्ट्रिय
पुरस्कार सँ सम्मानित होयबाक योग्य अछि । रामभजन जी केर निर्देशन आ सब कलाकार केर प्रस्तुति लाजबाब अछि ।
